नई दिल्ली, 04 अप्रेल। भारतीय मजदूर संघ (BMS) के कोल प्रभारी के. लक्ष्मा रेड्डी और उनकी टीम ने सीआईएल (CIL) और कोयला कामगारों से जुडे़ ज्वलंत मुद्दों को किनारे लगा दिया है, जो वर्तमान परिदृश्य में कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
के. लक्ष्मा रेड्डी ने अखिल भारतीय खदान मजदूर संघ (ABKMS) के नए पदाधिकारियों को साथ लेकर सीआईएल चेयरमैन और कोयला सचिव से मुलाकात की है। कोल सेक्टर इन दो शीर्ष अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा गया है।
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आश्चर्य की बात है कि इस ज्ञापन में वे ज्वलंत मुद्दे गायब हैं, जो वर्तमान में गूंज रहे हैं। 9.4.0 को लेकर कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी ने आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह को उनके पत्र का जो जवाब दिया है, इसमें उन्होंने कहा है कि स्थायी रूप से विकलांग कर्मचारी के आश्रितों को रोजगार प्रदान करने के लिए एनसीडब्ल्यूए के खंड 9.4.0 को पुनः लागू करना संभव नहीं है। कोयला मंत्री के अनुसार इसको लेकर यूनियन की सहमति है। दूसरी ओर 28 मार्च को नई दिल्ली स्थित जंतर- मंतर कार्य करने में असमर्थ कामगारों के परिजनों ने 9.4.0 को फिर से लागू करने को लेकर धरना प्रदर्शन किया।
बीएमएस के कोल प्रभारी एवं एबीकेएमएस ने इस विषय को ज्ञापन में रखना और कोल सचिव से चर्चा करना जरूरी नहीं समझा। कोयला मंत्री द्वारा राज्यसभा को लिखे गए पत्र और उसमें उल्लेखित बातों को लेकर कोल सेक्टर में बवाल मचा, लेकिन के. लक्ष्मा रेड्डी एवं उनकी टीम ने चुप्पी साधे रखी। सवाल उठने लगे कि क्या बीएमएस मेडिकल अनफिट यानी 9.4.0 को लेकर गंभीर नहीं है।
MDO सहित इन मुद्दों को भी नहीं उठाया
पिछले दिनों बीएमएस के कोल प्रभारी श्री रेड्डी को दीपका, कोरबा आगमन हुआ था। इस दौरान उन्होंने मीडिया से चर्चा करते हुए खदानों के निजीकरण को कामगारों के हितों के लिए खतरा बताया था। उन्होंने जोर देकर कहा था कि बीएमएस एमडीओ मॉडल का पुरजोर विरोध करता है।
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कोल सचिव के मुलाकात के दौरान यह मुद््दा भी न ही लिखित और न ही मौखिक रूप से सामने आया। इसी तरह एक जनवरी 2017 से ग्रेच्युटी, DHFL घोटाला, रिस्ट्रिक्टेड सर्टिफिकेट, SFVRS, पेंशन रिवीजन जैसे बड़े और गंभीर मुद्दे भी ज्ञापन में सम्मिलित नहीं किए गए।
इस संदर्भ में चर्चा करने के लिए ABKMS के महामंत्री सुजीत सिंह को उनके मोबाइल नम्बर 9131970144 पर दो बार संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंन कॉल रिसीव नहीं और न ही कॉल बैक किया।